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कैसे बयां करूँ ये रात.. मोहब्बत की, तेरे इंतजार में सिर्फ तारीखें बदलती हैं




कैसे बयां करूँ ये रात.. मोहब्बत की

तेरे इंतजार में सिर्फ तारीखें बदलती हैं





जो सामने जिक्र नहीं करते

वह अंदर ही अंदर बहुत फिक्र करते है





तुझसे लिपटती हूँ तो वायरस मर जाते है 

ए जान तू तो पूरा सेनिटाइजर है


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