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यादों का स्वेटर


ये बारिश भी बड़ी निंगोड़ी और बे-हया है.... वक्त- बे- वक्त कभी भी यादों के दरवाजों पर दस्तख़ दे मन में खट्टी- मिठी बातों का सैलाब उठा देती है, कभी पुरानी यादों को जगाने लगती है तो कभी सुलाने और तो और कभी-कभी बौछारों भरी सिलाई उठाकर छोटी- बड़ी, गोल-मटोल बूंदो को चुन यादों का नया स्वेटर भी बुनने लगती है.... ऐसा ही यादों का एक स्वेटर आज की बारिश भी बुन रही है मेरी जन्मभूमि  पर....

   पर ये स्वेटर ऐसी कड़वी और कभी ना भुलाई जानी वाली बूंदों से खुद को बुन रही है ये पता न था...जो जीते- जी कभी भी इस असहनीय पीड़ा को ढाँप नही पाएगी| एक ऐसी पीड़ा जिसका खालीपन कोई भी बसंत नहीं भर पाएगा ।

ये पीड़ा विरह की पीड़ा से भी अत्यंत दु:खद है जिसकी भरपाई कोई साल, कोई भी त्यौहार नहीं कर पाएगा...

जो किसी के जीते- जागते अस्तित्व को एक क्षण में अनस्तित्व में परिर्वतित कर देती है जिसे हम आमतौर पर  "मौत" की पीड़ा के भाव से जानते हैं, किसी अपने को हमेशा- हमेशा के लिए खो देने की पीड़ा, उसके फिर कभी वापस ना आने कि पीड़ा जो मगज़ और मन में एक चक्रवात सा उत्पन्न कर देती है। एक माँ, एक प्रेयसी और स्वंय खुद वो अदृश्य आत्मा जिसके इच्छाओं और सपनों के चूर-चूर होने की कराह दो दुनियाओं (इहलोक और परलोक) को एक बिंदु पर ला खड़ा करती है जिसे हर्फ़ों में बयाँ करना तक मुश्किल है।

तीन दिन से ना थमने वाली आज की ये बारीश बाहर से लेकर मन के भीतर तक ऐसा जलजला उत्पन्न कर रही है जो छलक- छलक कर एक माँ की आँखों को आंसुओं से डूबो दे रही है, एक पिता जो निढाल, बेसुध पड़ा इस कशमश में है की वो किसे क्या बताए किसे क्या समझाए....। कितना कुछ चल रहा है आज...इस मन में (सांसारिक मन) और उस मन (असांसारिक मन) में भी, सब शून्य पर चला गया है, सारी बातें, सारे वादे, सारी शिकायतें, सारी इच्छाएँ जिन्हें हम सजोते रह जाते हैं, जिसे पूरा करने के लिए सही वक्त का इंतजार करते रह जाते हैं.... सब धरी की धरी रह जाती हैं पर वो सही और सहज वक्त कभी नहीं आता!! ना जाने क्यों आज की ये बारिश मन में खुशी के बजाय खलिश ले आई है... ये उछलती बूंदे जो हमेशा खुशहाली और खनक से घर, गली, आँगन, चौराहे तक को सराबोर करती थी....आज बहुत गहरी और कभी ना भूला पाने वाली उदासी लेकर आईं हैं.... ये बारिश मुझे अति प्रिय है पर ये अपने सलाई के फंदों में एक फंदा ऐसा लगाएगी इसका अंदाजा मुझे कभी न था ।

इस नाते छोटी- २ खुशियों की बाँह पकड़िए और गुलज़ार होइए... जो नहीं है उसे छोड़िए जो है उसे संभालिए और जो आएगा तब जिया जाएगा... ।।

भावभिनी श्रद्धांजलि...

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